Chalore Man ShantiKunj
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चलो रे मन शान्तिकुञ्ज सुखधाम
चलो रे मन शांतिकुञ्ज सुखधाम।
जहाँ गूँजती है गुरुवर की, वाणी आठों याम।।
ज्योति अखण्ड जहाँ जलती है, जहाँ अहंता खुद गलती है।
नित नूतन आशा जगती है, हवा बहुत अपनी लगती है।
सफल मनोरथ करती जिसकी, माटी ललित ललाम।।
जन सेवा का सार जहाँ है, देवोपम संसार जहाँ है।
हर दु:ख का उपचार जहाँ है, जीवन का आधार जहाँ है।।
प्रतिभायें रहती हैं तजकर, धन, साधन, पद, नाम।।
नवयुग का युगतीर्थ यही है, शांति न इतनी और कहीं है।
इसकी अति उर्वरा मही है, यहाँ तनिक आलस्य नहीं है।
तम डूबे जग ने देखी है, भोर यहीं अभिराम।।
सतयुग में विश्वास जहाँ है, बढऩे का उल्लास जहाँ है।
कोई नहीं निराश जहाँ है, नहीं दैन्य का वास जहाँ है।
उस पावन धरती को कर लें, श्रद्धा सहित प्रणाम।।
जहाँ पहुँचकर हर साधक को, गुरु का संरक्षण मिल जाता।
माँ भगवती दुलार लुटतीं, हर साधक निहाल हो जाता।
सतत् मार्गदर्शन करते हैं, जहाँ स्वयं श्रीराम।।
मुक्तक :-
शान्तिकुञ्ज युग तीर्थ हमारा, चलकर शीश झुकाएँ।
गुरु का ज्ञान प्यार माता का, सहज भाव से पाएँ।।
फिर घर-घर जाकर वह बाँटें, जो हमने है पाया।
शान्तिकुञ्ज के संदेश को, जन-जन तक पहुँचाएँ।।


Comments

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Ramanuj Hirwani
2014-05-03 15:43:49
Ghosala Us Chahakti Jeewan Ka Jo Jiwant Jagrit Hai "Guru-Prashad Jeewan-Bhaw Tarnam....." Pranam .
Vijay Hirwani
2014-05-03 15:41:42
Ghosala Us Chahakti Jeewan Ka Jo Jiwant Jagrit Hai "Guru-Prashad Jeewan-Bhaw Tarnam....."
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