Har Prani Mein Roop Tumhara
Pragya Geet Mala - All Songs

हर प्राणी में रूप तुम्हारा

हर प्राणी में रूप तुम्हारा, पंकज सा मुस्काता।
रविमण्डल की ज्योति तुम्हीं हो, हे गायत्री माता॥

जड़ मिट्टी के इस पुतले को, किया तुम्हीं ने चेतन।
बुद्धि विवेक तुम्हीं से पाकर, सार्थक हुआ मनुज तन।

तुम्हें समर्पित होकर मानव, परमहंस बन जाता॥
खेला करता अंश तुम्हारा, शिशु की निश्छल छवि में।

तुम्हीं साधना हो साधक में, दिव्य कल्पना कवि में।
अखिल ज्ञान का सत्य तुम्हारा, गौरव निश-दिन गाता॥

हर नारी में देखी जिसने, प्रकट तुम्हारी छाया।
उसने ही जगजननि तुम्हारा, अनुपम दर्शन पाया।
तुमको पाकर जुड़ जाता है, सबसे निर्मल नाता॥

ऐसी शक्ति हमें दो अम्बे, युग परिवर्तन लायें।
दु:ख दैन्य रह जाए न भू-पर, नया समाज बनायें।
मानवता की कीर्ति बढ़ायें, बनकर संकट त्राता॥

मुक्तक :-

जगजननी! जग के कण-कण में, आप स्वयं संव्याप्त हैं।
लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा की, सभी शक्तियाँ प्राप्त हैं।।
अपनी गोद बिठा लो माता, अभय सभी से हो जायें।
फिर अज्ञान, अभाव, निर्बलता, सब व्यवधान समाप्त हैं।।


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vipin mandloi
2012-03-24 18:18:56
graceful song
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Duration : 6:19