Aaya Devdut Dharti Par
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आया देवदूत धरती पर,
आया देवदूत धरती पर, स्वर्णिम सृष्टि बसाने

तमसे लड़ने ज्योति सुतों को फिर झकझोर जगाने
आया देवदूत धरती पर,
हिमगिरी सा जो आदर्शों के लिए रहा दृढ़ अविचल
ज्ञानगंग की सुरसरि जिससे हुई प्रवाहित छलछल,
संस्कृति के इस युगप्रहरी में महाकाल ही हंसते
प्रेम दया करूणा के निर्मल स्रोत जहां से झरते
तत्पर था जो मानव हित में, ही निज सत्य गलाने,
तमसे लड़ने ज्योति सुतों को फिर झकझोर जगाने
आया देवदूत धरती पर,

क्षमताओ के महासिंधु की बिंदु थाह कब पाते,
ऋद्धि सिद्धि वैभव विभूति, जिसके तल में गहराते।
अंतरिक्ष सा जो विराट ब्रम्ह्यंड रूप दिखलाता
विश्व व्यवस्था पालक हंता सर्वशक्ति उदगाता।
भारत भू पर हुआ अवतरित इसका मान बढ़ाने
तमसे लड़ने ज्योति सुतों को फिर झकझोर जगाने
आया देवदूत धरती पर,

था जीवन्त प्रखर प्रज्ञा जो, तप में सविता सुत था,
युग का व्यास ज्ञानगंगा का भागीरथ वह खुद था
बन कर बुद्ध रोक दी जिसने बुद्धिवाद की आंधी,
त्याग तितिक्षा तप सेवा की सतत साधना साधी।
किया विनिर्मित नया यंगठन युग प्रवाह पलटाने,
तमसे लड़ने ज्योति सुतों को फिर झकझोर जगाने
आया देवदूत धरती पर,

युग सृष्टा के चरणो में,शुचि श्रंद्धाजलि समर्पित।
तन मन धन सर्वश्व सभी अब है उस प्रभु को अर्पित।
हिमगिरी का कहता प्रतीक तुम दृढ़ संकल्प जगाना
कहता उपवन नंदनवन सा वसुधा को महकाना।
संकल्पों का पर्व बने यह नव इतिहास रचाने
तमसे लड़ने ज्योति सुतों को फिर झकझोर जगाने
आया देवदूत धरती पर,


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vipin mandloi
2012-03-23 17:35:45
very good song
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Duration : 10:27