Yah Raah Nahi Hai Phoolo Ki
Pragya Geet Mala - All Songs

यह राह नहीं है फूलों की
यह राह नहीं है फूलों की, काँटे ही इस पर मिलते हैं।
लेकर के दर्द जमाने का, बस हिम्मत वाले चलते हैं।।
कब किसने कहा था ईसा से, तुम सूली के सोपान चढ़ो।
किसने सुकरात को समझाया, विष के प्याले की ओर बढ़ो।।
जिसने असली आवाज सुनी,उसने यह मंजिल खुद ही चुनी।
युग-प्रहरी के उर केस्वर ही, बनकर तूफान मचलते हैं।।
लेकर के दर्द जमाने...।।
थी कौन कमी उसे गौतम को, जिसने वह वैभव छोड़ा था।
मंसूर ने बनकर दीवाना, किस हुश्न से नाता से न टले।।
थी रात अँधेरी फिर भी चले, अघात सहे, पथ से न टले।
इन दर्द भरें पद चिन्हों पर, पूजा के सरसिज खिलते हैं।।
लेकर के दर्द जमाने ...।।

आज़ाद, भगतसिंह, बिस्मिल ने, भी राह यही अपनाई थी।
इसमें ही गाँधी बापू ने, सीने पे गोली खाई थी।।
कुछ और भले ही मत मानो, पर कीमत अपनी पहचानो।
बलिदान के साँचे में सच्चे, इन्सान के सिक्के ढलते हैं।।
लेकर के दर्द जमाने ...।।
जीने को जिया करते हैं यहाँ, पशु-पक्षी, कीट, पतंग सभी।
इतिहास के गुलशन में लेकिन, आता बासन्ती रंग तभी।।
जब ऐसा माली आता है, जो जीते जी गल जाता है।
बरसों तपती है जो माटी, उसमें से रत्न निकलते है।।
लेकर के दर्द जमाने ...।।

मुक्तक :-
काटों के पथ पर चलना है, जन सेवा कोई खेल नहीं।
जनहित में मरने वालों का, फूलों से कोई मेल नहीं।।
कायर ही क्षण-क्षण मरते हैं, बलिदानी मरते एक ही बार।
भोगों से मुक्ति अरे पाओ, मानव जीवन है जेल नहीं।।
Ye Raah rah nahi hai Phoolo ki Kante hi esame milte hai


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