Badlo Apni Chal Naya
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बदलो अपनी चाल
बदलो अपनी चाल, नया युग आने वाला है।
हुई दिशायें लाल, अँधेरा जाने वाला है॥
अब तक था घनघोर अँधेरा, छाया इस धरती पर।
था आलस्य प्रमाद भरा, कण-कण इस जगती पर॥
कटा तिमिर का जाल, उजाला छाने वाला है।॥
दसों दिशायें जाग रही हैं, लेकर के अँगड़ाई।
मुर्गे बोले नव प्रभात की, बेला है अब आई॥
पक्षी दल जग पड़ा, प्रभाती गाने वाला है॥
जागें और जगायें अब भी, सोना है नादानी।
चलो करें नूतन प्रकाश के , युग की हम अगवानी॥
जिसने भरी उछाल, सफलता पाने वाला है॥
जिनने कृष्ण, बुद्घ, गाँधी को, जाना और पहचाना।
वे चल पड़े साथ में उनको, पड़ा नहीं पछताना॥
फिर वे हुए निहाल, कौन झुठलाने वाला है॥
मुक्तक :-
समय को देख जो बदला नहीं, वह रह न पायेगा।
कभी दो शब्द आदर के, जमाना कह न पायेगा।।
अगर जकड़े रहीं, आलस्य की ही बेडिय़ाँ उसको।
नदी के दूसरे तट तक, कभी वह जा न पायेगा।।


Comments

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sheetal tiwari
2014-01-09 08:36:51
great song
RAM NARESH GUPTA
2013-11-16 22:51:43
yh geet hame bahut pasand hai
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Duration : 6:27