Ab Phir Se Satyug Aayega
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अब फिर से सतयुग आयेगा

अब फिर से सयुग आयेगा, यह बोल रहा है महाकाल।
निश्चय ही दुनियाँ बदलेगी, निश्चित ही परिवर्तन होगा।
नव भव्य भावना जागेगी, नवयुग का आरोहण होगा।
है कौन शक्ति जो रोक सके, अब काल चक्र की प्रबल चाल।।
है वर्ष हजारों बीत चुके, अन्यायों को सहते-सहते।
है बीत चुकी सदियाँ अनेक, इस कलियुग में रहते-रहते।
चल चुकी बहुत पर अब न चलेगी,कलि की कोई कुटिल चाल।।
अन्यायी अत्याचारी की अब, खैर नहीं निश्चित जानो।
सत्ता लोलुप मिट जायेंगे, चाहे मानो या न मानो।
अब खड़ा हो चुका जनमानस, ले महाक्रांति की नव मशाल।।
क्यों है निराश क्यों है हताश, तू है भारत माँ का सपूत।
आने वाले कल का तो तुझको, ही बनना है अग्रदूत।
इसलिए भीरुता छोड़ प्रकट, कर दे अपना पौरुष कराल।।
अब दूर नहीं है वह दिन जब, सबमें मानवता आयेगी।
सब ओर विश्व में सत्य न्याय की, धर्म ध्वजा फहरायेगी।
टूटेंगे सब ये क्षुद्र बाँध, लहरायेगा सागर विशाल।।

मुक्तक -
नहीं दिन दूर है अब वह, मनुज भगवान जब होगा।
नये इन्सान का युग का, नया निर्माण अब होगा।।
मनुज के आत्म गौरव का, पुन: उत्थान अब होगा।
जगत् में शांति का हर कण्ठ से, जयगान अब होगा।।


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Vivek kumar sharma
2012-12-07 06:55:13
I like this song very much
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Duration : 7:30