Auron Ke Hit Jo Jeta Hai
Pragya Geet Mala - All Songs

औरों के हित जो जीता है
औरों के हित जो जीता है, औरों के हित जो मरता है।
उसका हर आँसू रामायण, प्रत्येेक कर्म ही गीता है॥

जो तृषित किसी को देख सहज, ही होता है आकु ल-व्याकुल ।
जिसकी साँसों में पर पीड़ा, भरती है अपना ताप अतुल॥
वह है शंकर जो औरों की, वेदना निरन्तर पीता है॥
जो सहज समर्पित जनहित में, होता है स्वार्थ त्याग करके।
जिसके पग चलते रहते हैं, दु:ख दर्द मिटाने घर-घर के॥
वह है दधीचि जिसका जीवन, जगहित तप करके बीता है॥
जिसका जीवन संघर्ष बनी, औरों की गहन समस्या है।
तम में प्रकाश फैलाना ही, जिसकी आराध्य तपस्या है॥
जो प्यास बुझाता जन-जन की, वह पनघट कभी न रीता है॥
जिसने जग के मंगल को ही, अपना जीवन व्रत मान लिया।
परिव्याप्त विश्व के कण-कण में, भगवान्ï तत्त्व पहचान लिया॥
उस आत्मा का सौभाग्य अटल, वह ही प्रभुु की परिणिता है॥

मुक्तक :-
जिया स्वयं के लिये नहीं जो-औरों के हित मरना सीखा।
दु:खियारी पीडि़त मानवता-देख के जिसका अन्तस्ï चीखा॥
बना वही जग का पैगम्बर-मन्दिर का भगवान बन गया।
गुरुद्वारे का ज्ञानग्रंथ वह-गिरजाघर की शान बन गया॥


Comments

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Nitesh Kumawat
2013-02-03 05:58:26
devmanav, mahapurush or desh bhakt
Manuel
2012-12-04 07:51:53
Whoeevr wrote this, you know how to make a good article.
PRASHANT SRIVASTAV
2012-11-12 15:32:34
yeh geet to vastaw me nar ko, naraya banane ka madhyam hai
DEEPAK RGHAV
2012-10-22 19:32:59
औरों के हित जो जीता है औरों के हित जो जीता है, औरों के हित जो मरता है। उसका हर आँसू रामायण, प्रत्येेक कर्म ही गीता है॥ जो तृषित किसी को देख सहज, ही होता है आकु ल-व्याकुल । जिसकी साँसों में पर पीड़ा, भरती है अपना ताप अतुल॥ वह है शंकर जो औरों की, वेदना निरन्तर पीता है॥ जो सहज समर्पित जनहित में, होता है स्वार्थ त्याग करके। जिसके पग चलते रहते हैं, दु:ख दर्द मिटाने घर-घर के॥ वह है दधीचि जिसका जीवन, जगहित तप करके बीता है॥ जिसका जीवन संघर्ष बनी, औरों की गहन समस्या है। तम में प्रकाश फैलाना ही, जिसकी आराध्य तपस्या है॥ जो प्यास बुझाता जन-जन की, वह पनघट कभी न रीता है॥ जिसने जग के मंगल को ही, अपना जीवन व्रत मान लिया। परिव्याप्त विश्व के कण-कण में, भगवान्ï तत्त्व पहचान लिया॥ उस आत्मा का सौभाग्य अटल, वह ही प्रभुु की परिणिता है॥ मुक्तक :- जिया स्वयं के लिये नहीं जो-औरों के हित मरना सीखा। दु:खियारी पीडि़त मानवता-देख के जिसका अन्तस्ï चीखा॥ बना वही जग का पैगम्बर-मन्दिर का भगवान बन गया। गुरुद्वारे का ज्ञानग्रंथ वह-गिरजाघर की शान बन गया॥
Vikash singh
2012-04-20 21:45:36
Is geet me hme syam gurudev ki aur rishion ke jeevan ki sachai aur uddeshya dikhai deta hai...bahut hi prernadai geet hai ye..
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Duration : 7:31