Hath Par Yun Hat Rakhkar
Pragya Geet Mala - All Songs

हाथ पर यूँ हाथ रखकर

हाथ पर यूँ हाथ रखकर तुम न बैठो।
सोच लो अब यह समय संक्रांति का है।।

कुछ न कुछ अब कर गुजरने का समय है।
यह सहस्राब्दी बदलती सन्धि बेला।।
ठहर पायेगा नहीं तूफान में अब।

वह निबल हो या सबल कोई अकेला।।
बस यही संकेत है मिलकर चलो तुम।
अब समय क्षण भर नहीं विश्रान्ति का है।।

हर तरफ हैं दृश्य ऐसे इस समय की।
धार में बिगड़ा हुआ हर सन्तुलन है।।
सब ढलानों पर फिसलते जा रहे हैं।
इस तरह निश्चित पराभव है, पतन है।।
सावधानी से तुम्हें हर पग बढऩा।
यह समय हर ओर घोर अशान्ति का है।।

आत्मबल लेकर अगर तुम बढ़ सकोगे।
लक्ष्य पर ही दृष्टि यदि हर पल रहेगी।।
तो समझ लो इस भयंकर धार में भी।
नाव मन चाही दिशा में ही बहेगी।।
आज तो निश्चित अडिग संकल्प ले लो।
यह समय बिल्कुल न अब दिग्भ्रान्ति का है।।
बस तुम्हारी ही समन्वित शक्ति से ही।
स्वर्ग का फिर अवतरण होगा धरा पर।।
प्रकट होकर नवसृजन की चेतना से।
प्रीति का वातावरण होगा धरा पर।।
आ रहा है जो समय निश्चित समझ लो।
वह बहुत पावन, सुनिश्चित शांति का है।।

मुक्तक :-
हाथ पर धर हाथ बैठने से हार होती है।
बाहुओं की बल्ली से, नाव पार होती है।।
पाँव जब उठते अडिग, विश्वास लिए राही के।
राह देने को क्षितिज में दरार होती है।।


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KIRAN PATEL
2012-01-31 11:42:46
song with lots of inspirations
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Duration : 9:11