Mahakal Ki Chali
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महाकाल की चली सवारी
महाकाल की चली सवारी, चलो! साथ हो जायें।
यह परिवर्तन की वेला है, युग परिवर्तन लायें॥
महाकाल के चरण थिरकते, हैं देखो! दुरतगति से।
महाकाल की चाल सम्भाले, सम्भल रही न प्रगति से॥
विकृतियों की छाती पर, हो रहा कि ताण्डव नर्तन।
अब अनीति, अत्याचारों का, होगा निश्चित मर्दन॥
महाकाल के गण जैसे ही, हम भी कदम बढ़ायें॥
गूँज रहे धरती नभ में, जय महाकाल के नारे।
महाकाल के तेवर के, देखो तो तनिक इशारे॥
पाप पतन के डेरों में, अब हाहाकार मचा है।
महाकाल की कुपित दृष्टिï से, कोई नहीं बचा है॥
पाप वृत्तियों को जन-मन से, आओ मार भगायें॥
दुष्प्रवृत्तियों दुश्चिन्तन को, छोड़ सकेंगे जो भी।
हो जायेंगे महाकाल के, संगी-साथी वो ही॥
काम-क्रोध के, लोभ-मोह के, आओ बन्धन तोड़ें।
महाकाल की सत्प्रवृत्तियों से, अब नाता जोड़ें॥
महाकाल के गण बनने की, हिम्मत चलो जुटायें॥
महाकाल संकल्पित है, नवयुग प्रज्ञायुग होगा।
अशिव भाव अब टिक न सकेंगे, जन-जीवन शुभ होगा॥
परिवर्तन का चक्र चल रहा, सभी बदल जायेंगे।
जो न बदल पायेंगे, अपने आप कुचल जायेंगे॥
गूँज उठे हैं डमरू के स्वर, जागें और जगायें॥
मुक्तक :-
महाकाल का शंख बज गया, समय बदलने वाला है।
मत संशय में समय गँवाओ, यह कब रुकने वाला है।।
बड़ा कीमती है यह क्षण-क्षण, अरे समय क्यों हो खोते।
फिर मत करना हमें समय पर, सावधान तो कर देते।।


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