Re Man Jeevan Dhanya
Pragya Geet Mala - All Songs

रे मन जीवन धन्य
रे मन जीवन धन्य बना ले॥
युग तीरथ में आ के-गुरूवर को शीश झुका के।
माँ को निज व्यथा सुना के-श्रद्घा के सुमन चढ़ा ले॥
हमें सजल श्रद्घा दो माता-तेरे पूत कहायें।
गुरुवर हमें प्रखर प्रज्ञा दो-सद्कर्तव्य निभायें॥
जीवन भर नि:स्वार्थ रहें हम-जी भरकर परमार्थ करें हम॥
प्रज्ञा ज्योति जगा ले॥
जन-जन में देवत्व जगायें-ऐसी कला सिखा दो।
सबको दें अपनत्व हृदय में-इतना प्यार जगा दो॥
इस जीवन को सफल बना लें-ऋषियों जैसा पथ अपना लेें॥
शुभ संकल्प जगा ले॥
दुष्प्रवृत्तियों का अन्धियारा-जग से दूर हटा दें।
सद्ïप्रवृत्तियों के प्रकाश से-दुनियाँ को चमका दें॥
ऐसी शुभ सामथ्र्य जगा लें-मन का सब अभिमान गला दें॥
वह प्रतिभा विकसा ले॥
गुरु की ज्योति करें हम धारण-स्वयं दीप बन जायें।
समय और प्रतिभा,धन,साधन-प्रभु को भेंट चढ़ायें॥
यह जीवन प्रभु में घुल जाये-अपना शेष न कुछ रह जायें॥
निर्मल भक्ति जगा ले॥
मुक्तक-
गुरु चरण में लग गया मन-धन्य तू हो जायेगा।
देव दुर्लभ देह पाने का-अरे फल पायेगा॥
सध गया तू! सब सधेगा-बचा रहेगा कुछ नहीं ॥
सिद्घियाँ पीछे फिरेंगी-सिद्घ तू हो जायेगा॥


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