Hey Jag Janani Matu Bhagvati
Pragya Geet Mala - All Songs

हे जगजननी मातु भगवती
हे जगजननी मातु भगवती, पदवन्दन स्वीकार करो।
गुरु की गरिमा माँ की ममता, से जग का उद्धार करो।।
जाने कैसे आदर्शों से, मन का रिश्ता टूट गया।
इसीलिए सौभाग्य हमारा, माता हमसे रूठ गया।।
तेजस्वी गुरुता से माता, दुर्भावों को फटकारो।
माँ अपनी पावन ममता से, सद्भावों को पुचकारो।।
जैसे भी हों रोगी मन का, अब तो तुम उपचार करो।।
हम क्या जानें कैसे हम सब, प्रभु चरणों से दूर हुए।
जाने क्यों माँ अमृत छोडक़र, हीन नशे में चूर हुए।।
भले-बुरे जैसे भी हैं माँ, आखिर तेरे बेटे हैं।
भटक गये थे लेकिन अब तो, तव चरणों में लेटे हैं।।
टूटे हुए थके तन-मन में, नवल शक्ति संचार करो।।
समय ध्वंस की ओर बढ़ रहा, माँ तुम रक्षक बन जाओ।
महाकाल का रूप धरो माँ, इसे राह पर ले आओ।।
शुष्क मनों में प्रेम भावना, फिर से भर दो हे! माता।
द्वेषभाव मिट जाये बढ़े फिर, भाई चारे का नाता।।
कलि की कुटिल कुचाल काटकर,सतयुग का संचार कारो।।
हम सब पूत तुम्हारे माता, यज्ञ भाव से आये हैं।
जीवन यज्ञ रचायेंगे हम, यह संकल्प उठाये है।।
तेरा प्यार पिया है माता, उसको नहीं लजायेंगे।
यज्ञ हेतु आहुति बनकर, हम तेरा कर्ज चुकायेंगे।।
माँ बलिदानी भाव जगा दो, बस इतना उपकार करो।।
मुक्तक :-
हे जगदम्बे हमें शक्ति दो, दुर्भावों से जूझ सकें।
हे कल्याणी हमें भक्ति दो, सद्भावों पर रीझ सकें।।
बचा ध्वंस से नए सृजन में, हमें लगा दो हे! माता।
ऐसी सृष्टि बनायें जिसमें, गीत प्यार के गूँज सके।।


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