Ritambhra Maa
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ऋतम्भरा माँ तुम्हें प्रणाम
ऋतम्भरा माँ तुम्हें प्रणाम॥
प्राञ्जल प्रज्ञा तुम्हें प्रणाम॥
तुम हो सद्विवेक की जननी।
असद् अविद्या की क्षय करणी॥
सविता की प्रकाश किरणों की।
प्रखर अरुणिमा तुम्हें प्रणाम॥
शुचि शीतल सात्विक निर्झरणी।
मन:ताप दु:ख पीड़ा हरणी॥
विमल ज्ञान गंगा प्रवाहिनी।
मानव मेधा तुम्हें प्रणाम॥
माँ ममता मयी गोद हमें दो।
समता जन्य प्रमोद हमें दो॥
सद्प्रवृत्तियों सद्कर्मों की।
प्रबल प्रेरणा तुम्हें प्रणाम॥
सुरभित सुखद बयार चलाती।
जीवन के जलजात खिलाती॥
काव्य-कुमुद विकसाने वाली।
पावन प्रतिभा तुम्हें प्रणाम॥
हंसवाहिनी हंस हृदय दो।
जीवन निश्छल निर्मल कर दो॥
नीर-क्षीर के सद्विवेक की।
अनुपम महिमा तुम्हें प्रणाम॥
मुक्तक-
आदिशक्ति माँ की सुनो-महिमा शक्ति अपार।
जो कुछ जग में श्रेष्ठ है-वह सबकी आधार॥


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Duration : 7:47