Sawdhan Ho Jao
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सावधान हो जाओ
सावधान हो जाओ नवयुग आता है।
स्वागत थाल सजाओ नवयुग आता है।।
होवे कितना ही भारी, पाप अँधेरा।
भागेगा वह होते ही, पुण्य सबेरा॥
होना है दूर, अँधेरा मेरे भाई रे।
आना है शीघ्र, सबेरा मेरे भाई रे॥
सुनो जरा युग दूत, प्रभाती गाता है॥
दुष्टता भ्रष्ट स्वार्थ ये, रह न सकेंगे।
चोट यह महाकाल की, सह न सकेगे।
होगा न इनका, गुज़ारा मेरे भाई रे।
देखो तो दैवी, इशारा मेरेे भाई रे॥
जो भी हो विपरीत, सभी गल जाता है
शौर्य सद्भाव बढ़ेगा, सबके मनों में।
विश्व-बन्धुत्व पलेगा, जन-जीवन में॥
आयेगा स्वर्ग, जमीं पर मेरे भाई रे।
बनना है देव, हमीं को मेरे भाई रे॥
दैवी साँचे में ये, सब ढल जाता है॥
पाण्डवों जैसा प्रभु से, नेह लगा लो।
गिद्ध-ग्वालों जैसा ही, शौर्य जगा लो॥
जागेगा भाग्य, हमारा मेरे भाई रे।
आँखों में कल का, नज़ारा मेरे भाई रे॥
साहस करने वाला, धन्य कहाता है॥

मुक्तक-
नया युग आ रहा है, पात्रता विकसित करें अपनी।
उसी अनुरूप जीवन विधि, चलो निर्मित करें अपनी॥
स्नेह, सद्भाव, समता और ममता को सँजोकर हम।
नये युग को कि स्वागत अञ्जलि अर्पित करें अपनी॥


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XGzURqgWuatYxBv
2012-09-15 09:59:34
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Duration : 5:24