Basaye Ek Naya Sansar
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बसायें एक नया संसार

बसायें एक नया संसार-कि जिसमें छलक रहा हो प्यार॥
शोषक शोषित हो न जहाँ पर-सबकी सम्पत्ति एक।
हो तन मन में सुमन एक सा-जिसमें प्रेम विवेक॥
हो सबमें सहयोग परस्पर-एक बने घर द्वार॥
कि जिसमें छलक.........॥
जाति,पाँति के बन्धन टूटें-राष्ट्र-राष्ट्र सब एक।
धर्मों में हो सत्य समन्वय-रहे न झूठी टेक॥
मिटें अन्धविश्वास जगत के-हों विज्ञान विचार॥
कि जिसमें छलक.........॥
मानव-मानव की भाषा हो-सबकी एक समान।
मिलें हृदय से हृदय परस्पर-हो सच्ची पहचान॥
करें वचन से तन, मन,धन से-सब सबका उपकार॥
कि जिसमें छलक.........॥
करें अहिंसा का पालन सब-बने सत्य का राज।
सत्य, अहिंसा भक्त सभी हों- जग हो सत्य समाज॥
घर-घर स्वर्ग नचे आँगन में-मोक्ष धरे अवतार॥
कि जिसमें छलक.........॥
मुक्तक-
बिगड़ती जा रही दुनियाँ-नई दुनियाँ बसाना है।
स्नेह, सहयोग, श्रम की सुरसरि-फिर से बहाना है॥
जगा देवत्व मानव का-बनायें देव मानव को।
मनुज की इस धरा को-स्वर्ग जैसा ही बनाना है॥
There Is No Discrimination For Anything On This Earth..


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Duration : 6:19