Dhara Par Andhera
Pragya Geet Mala - All Songs

धरा पर अँधेरा बहुत
धरा पर अँधेरा बहुत छा रहा है-
दिये से दिये को जलाना पड़ेगा॥
घना हो गया अब घरों में अँधेरा।
बढ़ा जा रहा मन्दिरों में अँधेरा॥
नहीं हाथ को हाथ अब सूझ पाता-
हमें पंथ को जगमगाना, पड़ेगा॥
करें कुछ जतन स्वच्छ दीखें दिशायें।
भ्रमित फिर किसी को करें ना निशायें॥
अँधेरा निरकुंश हुआ जा रहा है-
हमें दम्भ उसका मिटाना पड़ेगा॥
विषम विषधरों-सी बढ़ी रूढिय़ाँ हैं।
जकड़ अब गयीं मानवी पीढिय़ाँ हैं॥
खुमारी बहुत छा रही है नयन में-
नये रक्त को अब जगाना पड़ेगा॥
प्रगति रोकतीं खोखली मान्यताएँ।
जटिल अन्धविश्वास की दुष्प्रथाएँ॥
यही विघ्न-काँटे हमें छल चुके हैं-
हमें इन सबों को हटाना पड़ेगा॥
हमें लोभ है इस $कदर आज घेरे।
विवाहों में हम बन गए हैं लुटेरे॥
प्रलोभन यहाँ अब बहुत बढ़ गए हैं।
हमें उनमें अंकुश लगाना पड़ेगा॥
मुक्तक-
लक्ष्य पाने के लिए, सबको सतत् जलना पड़ेगा।
मेटने घन तिमिर रवि की, गोद में पलना पड़ेगा॥
राह में तूफान आये, बिजलियाँ हमको डरायें।
दीप बनकर विकट, झंझावात में जलना पड़ेगा॥
No More Darkness On This Beautiful Earth..


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CHIRKUTRAO GORE
2013-11-03 17:33:00
THIS SONG IS RELEVANT ON THIS FESTIVE MOOD WHEN EVERYONE LIKES OT LIGHT A LAMP STILL SOMEWHERE DARKNESS PERSISTS.

2012-10-01 10:14:35
VISHNU KUMAR MAHATO
2012-09-12 16:28:52
this song inspired me to know more about the mission
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Duration : 6:16