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Guru Hi Naiya Guru Khebaiya
Pragya Geet Mala - All Songs

गुरु ही नैया गुरू खिवैया (अ)
गुरु ही नैया, गुरु खिवैया, गुरु ही पार लगावे।
अपने गुरु की बात न माने, उसको कौन उबारे।।
सुनो! शिष्यों गुरु की महिमा अपार।।

गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही हैं अवतार।
गुरु में ही ब्रह्माण्ड छिपा है, गुरु वेदों का सार।।
गुरु की आज्ञा सर माथे पर, यही गुरू की सीख।
सौंपे तन-मन गुरु आज्ञा पर, भले चढ़ा दें शीश।।
गुरु का अवलम्बन जो ले ले, भवसागर तर जावे।
हो जाओगे भवसागर से पार।।

गुरु नेत्रों में झाँको खुद को, सच सब मिल जायेगा।
कहाँं आज हो, क्या बनना है, क्षण में मिल जायेगा।।
अनगढ़ पत्थर सौंपो गुरु को, हीरे सा चमकोगे।
नक्षत्रों की बात नहीं है, सूरज सा दमकोगे।।
कौन है बछड़ा पान करे (जो) -गुरु पय की धार।।
पियो शिष्यों! ज्ञानामृत की धार।।

शिष्य कहाकर, आपने गुरु का दर्द समझ न पाते।
सूक्ष्म रूप में गुरु क्या कहते, गुरु को बूझ न पाते।।
जीवन प्राण गलाकर क्षण-क्षण, पीड़ा जो समझेगा।
कौन शिष्य जो बिना कहे ही, जीवन को बदलेगा।।
समय आज ऐसा आया है, युग का भार उठावें।
समझो शिष्यों! गुरु जीवन का सार।।

गुरु आज्ञा को शिरोधार्य कर, गुरुदक्षिणा चुकाएँ।
समयदान और अंशदान की, सुमनमाला पहनाएँ।।
कहाँ विवेकानन्द आज हैं, रामकृष्ण कहते हैं।
चन्द्रगुप्त को ढूँढ-ढूँढ, चानक्य आज थकते हैं।।
बनें स्वयं सत्यपात्र आज- अनुदान सभी हैं पावें।
अनुभव कर लो, गुरु ही हैं करतार।।

मुक्तक :-
भवसागर संसार है, गुरु है खेवनहार।
गुरु की नाव मिले बैठने को, हो जावो भव पार।।


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