Insan Se
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इन्सान से नफरत करते हो
इन्सान से नफरत करते हो, भगवान को तुम क्या पाओगे।
इन्सान को तुम अपना न सके, भगवान को क्या अपनाओगे।।
इन्सान प्रभु का बन्दा है, नफरत ही नरक का फन्दा है।
इन्सान को धोखा देकर के, भगवान को तुम झुठलाओगे।।
इन्सान की इज्जत करना ही, भगवान की पूजा होती है।
इन्सान को अपमानित करके, प्रभु को न मान दे पाओगे।।
खुद अपने दोष छिपाते हो, औरों को दोष लगाते हो।
इन्साफ को धोखा देते हो, ईमान को तुम क्या पाओगे।।
इन्सां को न देखो बाहर से, इन्सान को परखो भीतर से।
इन्सान के अन्दर जा बैठो, भगवान को तुम पा जाओगे।।
मुक्तक-
खिदमते इन्सान ही पूजा अरे भगवान की।
इसलिए जितनी बने, सेवा करो इन्सान की।।
दिल दुखाकर किसी का, भगवान खुश होगा नहीं।
नफरते इन्सान से, हत्या अरे ईमान की।।


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Duration : 7:42