Gurudev Hamare Shivshankar
Pragya Geet Mala - All Songs

वह सच्चाई आँखिन देखी
वह सच्चाई आँखिन देखी, कानों सुनी सुनाई।
गुरुदेव हमारे शिवशंकर वरदाई॥
उनका कोई आदि न देखा, अन्त न देखा।
उनके जैसा वीर योद्धा, सन्त न देखा।
उनकी जैसी ऋद्धि सिद्धियाँ, देती नहीं दिखाई॥
वे ज्ञानी थे, सरल हृदय थे, अभिमानी थे।
आत्म तत्त्ववेत्ता भी थे, वे विज्ञानी थे।
नापी नहीं जा सकी अब तक, तो उनकी गहराई॥
जनमानस की वे सकते थे, देख न पीड़ा।
असुर नाश का उनने स्वयं, उठाया बीड़ा।।
विषम वेदना जग की पीकर, उनने स्वयं पचाई।।
वे गृहस्थ थे ऐसे तो, वे संन्यासी थे।
वे मगहर थे, पुष्कर भी थे, शिवकाशी थे।।
स्वर्ग लोक की गंगो भू-पर, लाये और बहाई।।
गुणातीत, साकार और, वे निर्विकार थे।
वे प्राकृत थे, दिव्य ज्योति थे, निराकार थे।।
महाकाल बन कालकूट पी, सबको सुधा पिलाई।।
भूत भविष्यत् वर्तमान, सबके ज्ञाता थे।
पिता समान कठोर, कलेवर में माता थे।।
जगत नियन्ता बनकर, सारे जग को राह दिखाई।।
मुक्तक :-
सागर सी गंभीरता, गगन सदृश विस्तार।
हिमगिरि सी महिमा अटल, दाता परम उदार।।
कोटि-कोटि के प्राण तुम, गुरु पितु मातु समान।
कोटि-कोटि शत् नमन प्रभो! युगऋषि सन्त महान।।


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