Shayad Ruth Gayi Nari
Pragya Geet Mala - All Songs

शायद रूठ गई नारी से
शायद रूठ गई नारी से, उसकी ही त$कदीर।
उसकी तोड़ी गई प्यार की, सोने ही जंजीर।।
नारी श्रद्धा है, शुचिता है, स्नेह मूर्ति साकार
किया प्यार ने उसके, जन-जन में जीवन संचार।।
उसी प्यार को बना रहे क्यों? कुत्सित अैर अधीर।।
सुन्दरता हो गई प्यार का, अगर कहीं आधार।
तो फिर कम सुन्दर कन्या को, कौन करेगा प्यार।।
प्यार नहीं श्रृंगार प्यार तो, शैशव और फकीर।।
प्यार स्वर्ण है उसे दे दिया, लोहे जैसा रूप।
इस परित्रता को कर डाला, काला और कुरूप।।
इसे न बेचो गजियारों में, प्यार तत्व गम्भीर।।
प्यार नहीं सौदा बिकता वह, कभी नहीं बाजार।
आँख मिलाते उमड़ पड़े वह, कभी न होता प्यार।।
प्यार नहीं उपभोग मानवों, वह जीवन की पीर।।
अरे! सिनेमा वालों सम्भलो, इतना करो ना पाप।
पड़े झेलना कहीं न संस्कृति को, भारी सन्ताप।।
प्यार खिलौना नहीं प्यार तो, श्रद्धा की तस्वीर।।
ओ लंका निवासियों रोको, रावण के उत्पात।
नहीं बनाओ सूर्पणखा को, जंगल की बारात।।
प्यार डकैती नहीं प्यार तो, मीरा और कबीर।।


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Shyam ji
2018-11-04 15:20:17
Very nice Very nice
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Duration : 8:46