Jaag Gayi Nariyan
Pragya Geet Mala - All Songs

जाग गईं नारियाँ सावधान
जाग गईं नारियाँ सावधान।
चल पड़ी हैं क्रान्तियाँ सावधान।।
मुक्ति हम दिलायेंगे, समाज को कुरीति से।
मूढ़ मान्यताओं से, कुप्रथा कुरूढि से।।
अब न इन्तजारियाँ सावधान।।
बोलियाँ नहीं लगेंगी, अब हमारे लाल की।
होलियाँ नहीं जलेंगी, अब पराये माल की।।
दहेज के भिखारियों सावधान।।
सास से, ननद से, अब बहू ने ताने खायेगी।
लाड़ली बहू तो अब नहीं जलाई जायेंगी।।
अब बहू हैं बेटियाँ सावधान।।
धर्मतन्त्र, राजतन्त्र को दिशा दिखायेंगे।
दुष्टता व भ्रष्टताओं की जड़ें हिलायेंगी।।
आडम्बर वादियों सावधान।।
सास, बहू, ननद सभी एक हो दिखायेंगी।
लाड़ली बहू घरों में प्यार मान पायेंगी।।
बहू हैं बेटियाँ समान सावधान।।
मुक्तक :-
एक टहनी एक दिन पतवार बनती है।
एक चिनगारी दहक अंगर बनती है।।
जो सदा रौंदी गई बेबस समझकर।
वही मिट्टी एक दिन मीनार बनती है।।


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Duration : 6:14