Yug Yug Tak Jag Yaad
Pragya Geet Mala - All Songs

युग-युग तक जग याद
युग युग तक जग याद करे, तुम ऐसे कर्म करो।
कर्म में ऐसे मर्म भरो।।

जहाँ कहीं हो ताप वहाँ पर, सावन बन बरसो।
मरुथल मधुबन बने जहाँ पर, दिन दो चार बसो।।
जिससे मिल लो एक बार तुम, कभी नहीं बिसरो।।

पथिकों के गति भ्रमितों के तुम, बनकर दीप रहो।
सगर सुतों हित बनकर पावन, सुरसरि धार बहो।।
जग-उपवन में मलयज की, शीतलता ले विचारो।।

मानव हो तुम मानवता के, शुचि श्रृंगार बनो।
श्वाँसों के सागर में मन के, कर्णाधार बनो।।
तप:पूत तपों में तुम, नव कंचन बन निखरो।।

मुक्तक :-
कबीरा जब हम पैदा हुए, जग हँसे हम रोये।
ऐसी करनी कर चलो, हम हँसें जग रोये।।


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Duration : 7:30