Aap Nij Karuna
Pragya Geet Mala - All Songs

आप निज करूणा उड़ेलें

आप निज करूणा उड़ेलें, पात्र वह हमको बना लो।
जो कि करूणा कण सहेजें, नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेलें, नाथ वह हमको बना लो
आप निज करूणा उड़ेलें

कमी करूणा की नही है, वह दलित हो बह रही है।
धार करूणा की सहेजें, पात्र तो सच्चा वही है।।
नाथ करूणा कर करूण की, जात में हमको मिला लो।
जो कि करूणा कण सहेजें, नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेलें, पात्र वह हमको बना लो
आप निज करूणा उड़ेलें

रो उठे पर पीर से हम, द्रवित खारे नीर से हम।
हर सके कुछ पीर जग की, नाथ मनुज शरीर से हम।।
प्रभु द्रवित जन सेवकों की, पात्र में हमको बिठा लो।
जो कि करूणा कण सहेजें, नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेले, पात्र वह हमको बना लो।
आप निज करूणा उड़ेलें

पात्रता पायें विनय की, दीन दुखियों पर सदय की।
पर अनय से जूझने को, पात्रता पाये अभय की।।
बात जो बिगड़ी बनायें, बात वह हमको बना लो।
जो कि करूणा कण सहेजंें, नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेले, पात्र वह हमको बना लो
आप निज करूणा उड़ेलें

खो न जाये स्वार्थ में हम समर्पित सरवार्थ में हम।
प्राण प्रण से जुट सके प्रभु, अहिर्निशी परमार्थ में हम।।
आप जीवन के रची हो, मात्र रथ हमको बना लो।
जो कि करूणा कण सहेजे नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेले, पात्र वह हमको बना लो।
आप निज करूणा उड़ेलें

मोह का फिर महाभारत लड़ सके प्रभु प्राण पारथ।
भय उसे क्या जिन्दगी का आपको जो सैांप दें रथ।।
आप अर्जुन ही हो तो, आप जब गीता सुना दो।
जो भी करूणा कण सहेजें, नाथ वह हमको बना लो।।

आप निज करूणा उड़ेलें, पात्र वह हमको बना लो।
आप निज करूणा उड़ेलें


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Duration : 11:20