Gayatri Ma Ki Upasna
Pragya Geet Mala - All Songs

गायत्री माँ की उपासना
गायत्री माँ की उपासना, ही जीवन का सार है।
देश, धर्म, संस्कृति की, रक्षा की यह मूलाधार है।।
इसी साधना के सम्बल से, सिद्ध समर्थ हुआ यह देश।
ऋतम्भरा-प्रज्ञा का पाया था, हमने वरदान विशेष।।
अमृतमय जीवन हो जाता, इनमें इतना प्यार है।।
धर्म-अर्थ या काम मोक्ष, कोई भी इनसे दूर नहीं।
इनके ही प्रताप से रहती, सुख सुविधा भरपूर मही।
यह मानस की मणिमुक्ता है, यह सुमनों का हार है।।
गायत्री से विमुख हुआ जो, उसने खोया बुद्धि विवेक।
दिव्य ज्ञान का मर्म यही है, शुचिता की पावन अभिषेक।।
मानवता के हित का केवल, गायत्री आधार है।।
मुक्तक :-
गायत्री विश्वमाता हैं, सर्व समर्थ हैं।
उसकी शरण में जो गए, त्रितापमुक्त हैं।।
गायत्री की उपासना से, देव हम बनें।
उनकी कृपा बिना सभी, प्रयास व्यर्थ है।।


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