Aaj Mera Man Tumhare Geet
Pragya Geet Mala - All Songs

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता
शुष्क जीवन में पुनः नव रस बहाना चाहता।

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता।

चाहती हूं मैं तुम्हारी दृष्टि का केवल इशारा,
डूबते को बहुत होता एक तिनके का सहारा।
अब हृदय में प्यार का तूफान आना चाहता है,
शुष्क जीवन में पुनः नव रस बहाना चाहता।

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता।

एक योगी चाहता है बांधना गतिविधि समय की,
एक संयोगी भुलाना चाहता चिंता अनय की।
पर वियोगी आग पानी में लगाना चाहता है,
शुष्क जीवन में पुनः नव रस बहाना चाहता।

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता।

व्यंग करता है मनुज की श्रेष्ठता पर क्षूद्र जीवन,
हंस रहा जग की जवानी की उमंगो पर लड़कपन।
किन्तु कोई साथ सबके मुस्कुराना चाहता है,
शुष्क जीवन में पुनः नव रस बहाना चाहता।

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता।

नर्क लज्जित हो रहा है सौहाद्र की लगकर विषमता,
आज सुख भी रो रहा है देखकर दुख विवशता।
इंद्र का आसन सभी को डगमगाना चाहता है,
शुष्क जीवन में पुनः नव रस बहाना चाहता।

आज मेरा मन तुम्हारे गीत गाना चाहता।


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