Yanmandalam music
Pragya Geet Mala - All Songs

॥ गायत्री स्तवनम् ॥
यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालम्, रत्नप्रभं तीव्रमनादिरूपम्।
दारिद्र्य-दु:खक्षयकारणं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।१।।
शुभ ज्योति के पुंज, अनादि अनुपम, ब्रह्माण्ड व्यापी आलोक कत्र्ता।
दारिद्रय, दु:ख भय से मुक्त कर दो, पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलं देवगणै: सुपूजितम् विप्रै:स्तुतं मानवमुक्तिकोविदम्।
तं देवदेवं प्रणमामि भर्गं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
ऋषि देवताओं से नित्य पूजित। हे भर्ग! भवबन्धन-मुक्ति कत्र्ता।
स्वीकार कर लो वंदन हमारा। पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलम ज्ञानघनं त्वगम्यं, त्रैलोक्यपूज्यं त्रिगुणात्मरूपम्।
समस्त- तेजमय- दिव्यरूपं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
हे ज्ञान के घन, त्रैलोक्य पूजित। पावन गुणों के विस्तार कत्र्ता।
समस्त प्रतिभा के आदि कारण। पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलं गूढमतिप्रबोधं, धर्मस्य वृद्धिं कुरुते जनानाम्।
यत् सर्वपापक्षयकारणं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
हे गूढ अन्त:करण में विराजित। तुम दोष-पापादि संहार कत्र्ता।
शुभ धर्म का बोध हमको करा दो। पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलं व्यादिधविनाशदक्षं, यदृग- यजु:- सामसु सम्प्रगीतम्।
प्रकाशितं येन च भूर्भुव: स्व:, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
हे व्याधि-नाशक, हे पुष्टि दाता। ऋग्, साम, यजु, वेद संचार कत्र्ता।
हे भुर्भूव: स्व: में स्व प्रकाशित। पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति, गायन्ति यच्चारण-सिद्धसङ्गा:।
यद्योगिनो योगजुषां च सङ्गा:, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
सब वेदविद् चरण, सिद्ध योगी। जिसके सदा से हैं गान कर्ता।
हे सिद्ध सन्तों के लक्ष्य शाश्वत्। पावन बना दो हे देव सविता।।
यन्मण्डलं सर्वजनेषु पूजितं, ज्योतिश्च कुर्यादिह मत्र्यलोके।
यत्काल-कालादिमनादिरूपम्, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं।।
हे विश्व मानव से आदि पूजित। नश्वर जगत में शुभ ज्योति कत्र्ता॥
हे काल के काल-अनादि ईश्वर। पावन बना दो हे देव सविता॥ ७॥
यन्मण्डलं विष्णुचतुुर्मुखास्यं, यदक्षरं पापहरं जनानाम्।
यत्कालकल्पक्षयकारणं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं॥ ८॥
हे विष्णु ब्रह्मादि द्वारा प्रचारित। हे भक्त पालक , हे पाप हत्र्ता।
हे काल-कल्पादि के आदि स्वामी। पावन बना दो हे देव सविता॥८॥
यन्मण्डलं विश्वसृजां प्रसिद्घं, उत्पत्ति-रक्षा -प्रलयप्रगल्भम्।
यस्मिन् जगत्संहरतेऽखिलं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं॥९॥
हे विश्व मण्डल के आदि कारण। उत्पत्ति-पालन-संहार कत्र्ता॥
होता तुम्हीं में लय यह जगत् सब। पावन बना दो हे देव सविता॥९॥
यन्मण्डलं सर्वगतस्य विष्णो:, आत्मा परंधाम - विशुद्घतत्त्वम्॥
सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं॥१०॥
हे सर्वव्यापी, प्रेरक, नियन्ता। विशुद्घ आत्मा, कल्याण कत्र्ता॥
शुभ योग पथ पर हमको चलाओ। पावन बना दो हे देव सविता॥१०॥
यन्मण्डलं ब्रह्मविदो वदन्ति, गायन्ति यच्चारण - सिद्घसंघा:॥
यन्मण्डलं वेदविद: स्मरन्ति, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं॥११॥
हे ब्रह्मनिष्ठों से आदि पूजित। वेदज्ञ जिसके गुणगान कत्र्ता॥
सद्भावना हम सब में जगा दो। पावन बना दो हे देव सविता॥११॥
यन्मण्डलं वेद - विदोपगीतं, यद्योगिनां योगपथानुगम्यं॥
तत्सर्ववेदं प्रणमामि दिव्यं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यं॥१२॥
हे योगियों के शुभ मार्गदर्शक। सद्ज्ञान के आदि संचार कत्र्ता॥
प्रणिपात स्वीकार लो हम सभी का। पावन बना दो हे देव सविता॥१२॥
Yanmandalam With Sitar Music.


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Vishwjeet kumar
2019-02-23 00:02:27
Gupta143
Vishwjeet kumar
2019-02-23 00:01:55
Gupta143
skmishra
2014-03-01 22:33:17
PRANJAL100950
Parshuram kushwaha
2013-12-26 21:46:51
गायत्री स्तवन बहुत ही अच्छा गीत है ।जय गुरुदेव।
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Duration : 5:31