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Daravar Hajarnro Hai
Pragya Geet Mala - All Songs

दरबार हजारो हैं
दरबार हजारों हैं, तुम सा दरबार कहाँ।
अब क्यों भूले-भटकें, जब सज़दा किया यहाँ॥
जो भाव सहित तेरे, दरबार में आते हैं।
अनुशासन मानें तो, जी भरकर पाते हैं।
जी चाहा मिल जाए, ऐसा भण्डार कहाँ॥
सब ही तो तेरे हैं, तू सबकी .... है।
हो सबका सदा भला, ऐसा ही करता है।
सबका हित जहाँ सधे, ऐसा आधार कहाँ॥
तेरी करुणा पाकर, मिट जाते भेद सभी।
अपनापन ऐसा है, हो जाते तृप्त सभी।
चर-अचर सभी अपने, ऐसा परिवार कहाँ॥
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सानी न कोई तेरा, करतब सब न्यारे हैं।
भवरोग सभी छूटें, ऐसा उपचार कहाँ॥
मुक्तक-बहुत खोजा पर न पाया, इस भरे संसार में।
मिला सन्तोष वह गुुरुवर, आपके दरबार में॥
Song on the Guru Teerth.


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Duration : 9:56