Guru Charnon Me Aakar
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गुरु चरणों में आकर देखो

गुरु चरणों में आकर देखो-सब कलह क्लेश मिट जाते हैं।
अन्तर निर्मल हो जाता है-भवशूल कभी न सताते हैं॥

जब प्राण दु:खी होते जग के-मर्मान्तक हाहाकारों से।
जब बीच भँवर में नाव अलग-हो जाती है पतवारों से॥
संसार सिन्धु से तब गुरु ही-कर गहकर पार लगाते हैं॥

जब पीर हृदय को मथती है-दु:ख छा जाते मानस तन पर।
दुनियाँ के झंझट सहन नहीं-कर पाते हम अपने बल पर॥
तब काट हमारे पापों को-गुरु शान्ति सुधा बरसाते हैं॥

जब भेद नहीं हम कर पाते, सच-झूठ भरे उलझाओं में।
जब मार्ग नहीं हम चुन पाते-आसक्तिपूर्ण भटकावों में॥
उस चक्रव्यूह से सद्ïगुरु ही-निर्णय कर हमें बचाते हैं॥

जग को, प्रभु को, और आत्मा को-केवल गुरु ने ही जाना है।
सन्तों ने इसीलिए गुरु को-प्रभु से भी ऊँचा माना है॥
हम गोविन्द से पहले गुरु के-चरणों मे शीश झुकाते हैं॥

मुक्तक-
सद्गुरु का दरबार अनूठा-प्राण पिलाये जाते हैं।
दैहिक, दैविक, भौतिक तीनों-ताप मिटाये जाते हैं॥
है श्रद्धा विश्वास न जिनमें-उन भटकों का क्या कहना।
वरना मझधारों वाले भी-पार लगाये जाते हैं॥
Happiness of lotus feets of gurudev to his disciples.


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vipin mandloi
2012-03-22 07:49:33
very nice song
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Duration : 6:46