Hey Ritwij Hotao Aao
Pragya Geet Mala - All Songs

हे ऋत्विज होताओं! आओ
हे ऋत्विज होताओं! आओ, आओ यजन करो।
यशकामी श्रोताओं! आओ, आओ यजन करो।
आओ मिलकर यजन करो॥
देववैद्य संग सरस्वती ने, मिलकर यज्ञ रचाया था।
तुष्ट हो गये सभी देवगण, ऐसा यजन कराया था॥
इन्द्रराज को मिला यज्ञ से, बल ऐश्वर्य अकूता था।
जिसकी ऊँचाई त्रिलोक में, कहीं न कोई छूता था॥
बल ऐश्वर्य बढ़ाने आओ! आओ, यजन करो।
ओ बहिनों-माताओं! आओ, आओ यजन करो॥
यज्ञपुरुष से ही देवों ने, दान अपरिमित पाये हैं।
प्रबल, पराक्रम भरा देह में, वे अजेय कहलाये हैं॥
मिली अलौकिक वाक्शक्ति-अतुलित बल भरा शिराओं में।
पायी अनुपम श्रवणशक्ति-यश फैला दसों दिशाओं में॥
प्राण पराक्रम पाने! आओ, आओ यजन करो।
आस्थावान् प्रजाओं आओ! आओ यजन करो॥
यज्ञों से इन्द्रादिदेव में, दिव्य ज्ञान की ज्योति जली।
ओज मिला शुभ तेजस् जागा, देवों को सद्बुद्धि मिली॥
दिव्य श्रेष्ठ सन्तान प्राप्ति के, सद्गुण थे सबमें उभरे।
दिव्य लाभ मिल गये यज्ञ से, मन्यु और सामथ्र्य भरे॥
दैवी लाभ उठाने आओ! आओ, यजन करो।
पुत्रों और पिताओं आओ, आओ यजन करो।।
महा भेषजों-औषधियों से, यज्ञ देव सन्तुष्टï हुए।
मिला सोम इन्द्रादिदेव को, पाकर वे परिपुष्टï हुए॥
ऋषि प्रणीत यह महायज्ञ जो, जीवन में अपनाता है।
सुख-समृद्धि दाता देवों का, कृपा पात्र बन जाता है॥
दिव्य कृपा अपनाने, आओ, आओ यजन करो।
हे प्रबुद्ध नेताओं! आओ, आओ यजन करो॥

ऐसा होवे यज्ञ कि जो हर, मानव का कल्याण करे।
दुश्चिन्तन मिट जाय और, सद्चिन्तन का निर्माण करे॥
आज मनुजता बिलख रही है, उसको धैर्य बँधाना है।
दैवी संस्कृति के सिंचन से, नव उल्लास जगाना है॥
जीवन धन्य बनाने आओ! आओ यजन करो।
ओ जाग्रत आत्माओं! आओ, आओ यजन करो॥
तुम ईश्वर के राजकुँवर हो, मत कर्तव्य भुलाओ तुम।
स्वार्थ भी संकीर्ण डगर पर, अब मत पाँव बढ़ाओ तुम।।
जनमंगल के लिए समर्पित, जो कुछ भी कर जाओगे।
विविध रूप में उसे असंख्यों, गुना यहाँ तुम पाओगे।।
दैवी भाव जगाने आओ-आओ यजन करो।
नवयुग की प्रतिभाओं आओ-आओ यजन करो।।


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