Bharti Pukarti
Pragya Geet Mala - All Songs

भारती पुकारती संस्कृति
भारती पुकारती, संस्कृति गुहारती।
जाग! नौजवान जाग, राह पथ निहारती।।
जाग और जग-जगा, जागरण के गीत गा।
देख तो सही उधर, सूर्य सुबह का उगा।।
किल-किला उठी किरण, तिमिर को बुहारती।।
आज भारती उदास, क्योंकि सामने विनाश।
और देश का तरुण, कर नहीं रहा प्रयास।।
संस्कृति की व्यथा, तरुण को पुकारती।।
जाग देश के जवान, जाग शौर्य स्वाभिमान।
राष्ट्र, संस्कृति, समाज, जाग भाग्य के विधान।।
जागी तरुणाई ही, राष्ट्र को सँवारती।।
परिवर्तन काल है, हवा में उछाल है।
जो चला प्रवाह संग, हो गया निहाल है।।
महाकाल की तरंग, प्रखरता निखारती।।
मुक्तक :-
जवानों समय, चूकने का नहीं है।
समय की चुनौती, उछलकर उठाओ।।
अमर हो कहानी, जवानी की जग में।
विजय ध्वंस पर, नव सृजन की कराओ।।


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Duration : 5:26