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Sapooton Bharti Ke Maa Tumhe
Pragya Geet Mala - All Songs

सपूतों भारती के माँ तुम्हें
सपूतों भारती के माँ तुम्हें-आवाज देती है।
युवाओं! राष्ट्र के संस्कृति, हृदय की पीर कहती है।।

विखण्डित हो रही है, राष्ट्र की आदर्श समरसता।
उपेक्षित हो रही है, देव संस्कृति की सुगढ़ क्षमता।।
वतन की अस्मिता हर ओर से, आघात सहती है।।

असुरता स्वार्थ बन छाई हुई है, राष्ट्र चिन्तन पर।
किसे है भोग संस्कृति क्रूर बन्धन, मनुज तन-मन पर।।
विकलता देवसंस्कृति की, कलेजा चीर देता है।।

तुम्हें संवेदना की सुधा, युग ऋषि ने पिलाई है।
बनो तुम सृजन सैनिक श्रेष्ठ, यह आशा लगाई है।।
इसी में है तुम्हारा यश, मनुजता की भलाई है।।

उठो! झकझोर कर इस राष्ट्र का, गौरव जगा दो तुम।
इसी अभियान में निज शक्ति साधन,प्रिय लगा दो तुम।।
युवा ऊर्जा समय की चाल को भी, मोड़ देती है।।
मुक्तक :-
समस्यसा से ग्रसित है राष्ट्र, आशा है जवानी से।
समस्याएँ सुलझाती है, जवानी की रवानी से।।
जवानी! धर्म-ने, निमन्त्रण है दिया तुमका।
असुरता को कुचलना है, अरे! जीवट भवानी से।।
Pragya Song for Inviting Youth to fight for motherland.


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Duration : 6:12