Dharmaki Pataka
Pragya Geet Mala - All Songs

ओ धर्म की पताका
ओ! धर्म की पताका, फहरोऽऽ.....।
फहरो धरा गगन में, गगन में।।
उड़ती हो गंध भीनी, ज्यों दूर तक चमन में।
ओ! धर्म की पताका, फहरो.....।।

तू प्राण विश्व का है, अभिमान विश्व का है।
उज्ज्वल भविष्य का तू, अनुमान विश्व का है।।
उल्लास मिल सकेगाऽऽ- केवल....।
तेरे ही अनुकरण में-वरण में।। उड़ती.....।।
फैला जहर हवा में, धरती पे, आसमां में।
आशा बची है केवल, इस धर्म की ध्वजा में।
तम का मरण छिपा हैऽऽ- निश्चय....।।
ज्यों भोर की किरण में-किरण में।। उड़ती.....।।
कल्मष न कल मिलेगा, मानव सरल मिलेगा।
टूटेगा भ्रम जनम का, कर्मों का फल मिलेगा।।
लहरा के भाव भर दोऽऽ- भर दो....।
तुम यह हरेक मन में-मन में।। उड़ती.....।।
युग शक्ति जाग जाये, हर व्यक्ति जाग जाये।
सद्वृत्ति के लिए फिर, अनुरक्ति जाग जाये॥
होवे उदारता फिर, भू-पर ऽऽ.................।
प्रत्येक आचरण में, चरण में....॥ उड़ती.....॥
नव चेतना जगेगी, संवेदना जगेगी।
कल्याण को सभी के, भागीरथी बहेगी॥
डूबेगा फिर न कोई-कोईऽऽ...........॥
असहाय अश्रु कण में-कण में॥ उड़ती.....॥
Song on Dharma - Its Pran can bring back heaven on earth - if followed correctly.


Comments

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Lalit Rajak
2012-06-15 22:38:20
soul awakening song.
sajanlal
2012-06-11 05:38:27
vipin mandloi
2012-03-28 15:52:40
graceful song
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Duration : 9:06