Ma Umadti Jab Hriday Me
Pragya Geet Mala - All Songs

माँ उमड़ती जब हृदय में
माँ उमड़ती जब हृदय में, सजल सलिला स्नेहधारा।
और भी संकल्प दृढ़, होता चला जाता हमारा॥
हम हृदय भारी लिए, जब भी गये द्वारे तुम्हारे।
या अनेकों परिचितों के, बीच बनकर बे सहारे॥
दु:ख अकेलापन हृदय का, सब भुलाकर लौट आये॥
यँू तुम्हारे स्नेह की, शीतल फुहारों में नहाये॥
मातृ ममता के मलय, भीगे पवन का पा सहारा॥
पूज्य गुरुवर का सहज, संकेत अब आदेश होगा।
अब तितिक्षा-त्याग-तप, वाला बसन्ती वेश होगा॥
अब इसी सद्ïवेश में हर, द्वार-घर तक जायेंगे हम॥
ज्ञानगंगा में समूचे, विश्व को नहलायेंगे हम॥
मातृ-भू ने देवसंस्कृति, के लिए है कर पसारा॥
है समय थोड़ा मगर, उतने अधिक श्रम से बढ़ेंगे।
माँ! उमंगों से भरेंगे, किन्तु संयम से बढ़ेंगे॥
रोक पायेंगी नहीं, शीतल सघन अमराइयाँ भी॥
टोक पायेंगी न, पथरीली डगर या खाइयाँ भी॥
क्योंकि हर भटकाव से, हमको बचाता पथ तुम्हारा॥
अब गुलाबी रंग प्राची में, क्षितिज पर छा रहा है।
हर थका पग लक्ष्य पाने, को पुन: अकुला रहा है॥
अब धरा, नभ में न तम की, कष्टप्रद कारा रहेगी।
चेतना, उल्लास, आशा, की सतत् धारा बहेगी।
आज प्राणों की समर्पित, सतत् अपनी वसोधारा॥
Bhakti Pragya Song with inspiration.


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vipin mandloi
2012-03-28 15:31:12
graceful song
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Duration : 11:15