Guruwar Daya Ke Sagar
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गुरुवर दया के सागर
गुरुवर दया के सागर, तेरा दर जगत् से न्यारा।
दुनियाँ का दर भँवर है, तेरा दर ही है किनारा।।

तेरी दृष्टि है निराली, दुविधा को हरने वाली।
अन्धों की आँख में भी, नव ज्योति भरने वाली।
अज्ञान के तिमिर से, हर भक्त को उबारा॥

तेरा है ज्ञान चोखा, विज्ञान है अनोखा।
अपनाया इसे जिसने, उसने न खाया धोखा।
जो जुड़ सका न तुझ से, वह लुट गया बेचारा॥

तेरे दर पे सब बराबर, कोई बड़ा न छोटा।
चोखा बनाया सबको, आया भले ही खोटा।
जो भी शरण में पहुँचा, सबको मिला सहारा॥

दुनियाँ का रस लुभाता, मझधार में डुबाता।
तेरा-रस पुनीत पावन, है इष्ट से मिलाता।
भक्तों को इसी रस ने, भव सिन्धु से उबारा॥

मुक्तक :-
गुरु की महिमा का क्या कहना, न्यारा है दरबार गुरु का।
सबको प्यार लुटता इतना, प्यारा है दरबार गुरु का।।
बचना है दुनियाँ के धोखेबाजों के गोरखधंधों से।
सबसे तुम्हें बचा सकता है, ऐसा है आधार गुरु का।।


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ranjana kaushik
2012-02-06 10:18:54
gurudev aapkaa dar jagat se nyaraa......
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Duration : 7:39