Samajik Kranti
Pragya Geet Mala - All Songs

सामाजिक क्रांति के लिए सबसे आवश्यक यह है कि हम दूसरों से जो अपेक्षा करते है वैसा ही हम भी औरों के साथ करें। हर व्यक्ति के मन में वसुधैव कुटुम्बकम का विचार उत्पन्न किया जाना चाहिए। सामाजिक क्रांति के लिए उन आध्यात्मिक सिद्धान्तों को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए जिसमें महत्वपूर्ण ऐसे सिद्धान्त बनें हुए है जिसमें व्यक्तिवाद पर अकुंश करके समाजपरक बनता जाये। आत्मन: प्रतिकूलानि, परिसाम न समाचरे का सिद्धान्त अगर हम अपने जीवन में धारण कर ले तो हमारे सामाजिक जीवन में श्रेष्ठïता आ जाना स्वाभाविक है।
अनीति और अत्याचार जहाँ कहीं भी दिखाई पड़े वहाँ जटायु जैसा साहस एकत्रित करना चाहिए श्रेष्ठïता की स्थापना अपने तथा दूसरों में स्थापित करना तथा अनीति अत्याचार का विरोध भी अपने में तथा दोनों ही अपनाने को सामथ्र्य होनी चाहिए।
Inspirational thoughts of Param Pujya Gurudev Pandit Shriram Sharma Acharya ji about Samajik Kranti.


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