Kouno Kouno Guna Ganu
Pragya Geet Mala - All Songs

गुरु तेरे कौन-कौन

गुरु तेरे कौन-कौन गुण गाऊँ।
ब्रह्मा विष्णु, महेश्वर सबके, कौशल तुममें पाऊँ।।

माँ धरती सी-धारण क्षमता, ममता शुचिता या उर्वरता।
तुम हर साधक पर बरसाते, साधक जीवन धन्य बनाते।
छोटे-बड़े व ऊँच-नीच का, भेद न तुममें पाऊँ।।

तुम ऊसर में वृक्ष उगाते, कीचड़ में प्रिय कमल खिलाते।
साधक दिव्य दृष्टि पा जाते, लोहे से सोना बन जाते।
मैं भी अपने अनगढ़ मन मेंं, दिव्य भाव विकसाऊँ।।

तुम ब्रह्मा जैसे वरदानी, विष्णु सरीखे पालक ज्ञानी।
शिव जैसे प्रिय औघड़दानी, पुरुष रूप में माँ कल्याणी।
अपना सब कुछ सौंप तुम को, मैं भी धन्य कहाऊँ।।

यज्ञ रूप तुम जग हितकारी, महाकाल के तुम अवतारी।
अशिव विनाशक प्रलयङ्कारी, युग निर्माणी टेक तुम्हारी।
जिऊँ तुम्हारे लिए इसी हित, मैं भी मर खप जाऊँ।।

मुक्तक :-
सब धरती कागज करूँ, कलम करूँ वन राय।
सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाय।।


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vipin mandloi
2012-03-23 21:05:21
graceful song
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Duration : 9:31